Phone: 9993364092, 9685736702
चार धाम तीर्थ यात्रा नर्मदा परिक्रमा एवं सभी धार्मिक तीर्थ यात्रा करते हैं
हमारे 25 वर्ष पुराने अनुभव का लाभ ले यात्रा में सुबह चाय एवं नाश्ता एक बार भोजन और रात्रि विश्राम की उत्तम व्यवस्था रहती है
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नर्मदा तीर्थ यात्रा में प्रतिदिन सुबह चाय एवं नाश्ता दिया जाता है
नाश्ता रोजाना बदल बदल कर दिया जाता है
पोहा जलेबी समोसा जलेबी कचोरी आलू बड़ा भाजी बड़ा मंगोड़ी ब्रेड पकोड़े इत्यादि नाश्ते में दिए जाते हैं जिसकी कोई क्वांटिटी फिक्स नहीं होती है व्यक्ति अपनी सुविधा अनुसार ग्रहण कर सकता है
भोजन ---- दाल चावल सब्जी रोटी, खीर पूरी सब्जी पुलाव , दाल बाफले गुलाब जामुन मिठाई , भरत बाटी सलाद पापड़ अचार आदि भोजन व्यवस्था में शामिल रहते हैं
किसी आकाश में दुर्घटना चोरी की जिम्मेदारी व्यवस्थापक कि नहीं रहती है व्यक्ति अपने सामान का खुद ही जिम्मेदार है एवं अपने सामान का स्वयं ध्यान रखें

महत्व: नेपाल का सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन शिव मंदिर, जिसे भारत के केदारनाथ और अमरनाथ के बराबर माना जाता है।
2 ---- गंगासागर मेला पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला एक विशाल हिन्दू तीर्थ मेला है, जहाँ लाखों श्रद्धालु गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम (सागर द्वीप) पर पवित्र डुबकी लगाने आते हैं, जिससे मोक्ष मिलता है और पापों का नाश होता है; इसे 'सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार' कहा जाता है और यह कपिल मुनि की कथा से जुड़ा है।
गंगासागर मेला क्या है?
यह भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जो सागर द्वीप (पश्चिम बंगाल) पर लगता है, जहाँ गंगा नदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है।
यह एक वार्षिक मेला है जो हर साल जनवरी के मध्य में, मकर संक्रांति के शुभ दिन लगता है।
3 भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और उन्हें 'ब्रह्मांड के स्वामी' (Lord of the Universe) कहा जाता है, जिनकी पूजा ओडिशा के पुरी में उनके भाई बलभद्र (बलराम) और बहन सुभद्रा के साथ त्रिमूर्ति के रूप में की जाती है, और वे अपनी रथयात्रा के लिए विश्व-प्रसिद्ध हैं, जिसमें उनकी लकड़ी की अनोखी प्रतिमाएँ होती हैं।
मुख्य बातें:
अर्थ: 'जगत्' (ब्रह्मांड) और 'नाथ' (स्वामी) से मिलकर बना है, यानी ब्रह्मांड के स्वामी।
स्वरूप: भगवान विष्णु के अवतार, श्रीकृष्ण के रूप में पूजे जाते हैं, जो अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं।
4 ---- कोलकाता के काली माता मंदिर (मुख्यतः कालीघाट मंदिर और दक्षिणेश्वर मंदिर) का महत्व है कि यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां सती के शरीर के अंग गिरे थे, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है; यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने, बुरी शक्तियों से रक्षा करने और भारत की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है, खासकर नवरात्रि और काली पूजा के दौरान यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं.
महत्व के मुख्य बिंदु:
शक्तिपीठ का दर्जा: कालीघाट मंदिर, 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ देवी सती के दाहिने पैर की उंगली गिरी थी, जिससे यह अत्यंत पूजनीय स्थल बन गया है.
मनोकामना पूर्ति: मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले भक्तों की सभी इच्छाएँ माँ काली पूरी करती हैं, खासकर हर शनिवार को बड़ी संख्या में भक्त मन्नत लेकर आते हैं.
5 मैहर माता, मध्य प्रदेश के सतना जिले में त्रिकूट पर्वत पर स्थित माँ शारदा देवी का प्रसिद्ध मंदिर है, जो एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है; 'मैहर' का अर्थ 'माँ का हार' है, क्योंकि मान्यता है कि यहाँ देवी सती का हार गिरा था, और यह मंदिर ज्ञान, बुद्धि और मनोकामनाएँ पूरी करने वाली देवी को समर्पित है, जहाँ भक्त 1063 सीढ़ियाँ चढ़कर दर्शन करते हैं.
मुख्य बिंदु:
स्थान: मैहर, सतना जिला, मध्य प्रदेश, त्रिकूट पर्वत की चोटी पर.
देवी: माँ शारदा (ज्ञान और बुद्धि की देवी).
नाम का अर्थ: 'मैहर' का मतलब 'माँ का हार' (माई + हर) है, क्योंकि सती का हार यहाँ गिरा था.

यह यात्रा हमारे द्वारा 20 दिन में पूर्ण कराई जाती है जिसमें एक टाइम सुबह चाय एवं नाश्ता एवं दोपहर में भोजन और रात्रि विश्राम की व्यवस्था रहती है (1) ---- तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र और भव्य हिंदू मंदिर है, जो भारत के चार धाम और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, लंबे गलियारों और 22 पवित्र कुंडों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ माना जाता है कि भगवान राम ने रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए पूजा की थी।
( 2) तिरुपति ---- तिरुपति बालाजी (श्री वेंकटेश्वर स्वामी) भगवान विष्णु के अवतार हैं, जो कलियुग में भक्तों के कल्याण के लिए पृथ्वी पर प्रकट हुए और आंध्र प्रदेश के तिरुमाला की पहाड़ियों में निवास करते हैं, यह भारत के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय मंदिरों में से एक है, जहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और शांति पाने के लिए आते हैं, इन्हें भगवान विष्णु का रूप माना जाता
( 3)कन्याकुमारी माता की कहानी देवी पार्वती के एक स्वरूप की है, जिनका जन्म बाणासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए हुआ था, जिसे केवल एक कुंवारी कन्या ही मार सकती थी; उन्होंने शिव से विवाह करने की तपस्या की, लेकिन नारद मुनि की चाल से विवाह टल गया, जिसके बाद देवी ने कुंवारी रहकर बाणासुर का वध किया और कलियुग के अंत तक वहीं रहने का निर्णय लिया, जिससे इस स्थान को 'कन्याकुमारी' (कुंवारी कन्या) नाम मिला।
(4)Mahakaleshwar Temple: इस वजह से उज्जैन में ...मध्य प्रदेशके प्राचीन शहर उज्जैन में स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग भारत के बारह सबसे पवित्र शिव तीर्थोंमें से एक है , जो अपने अनूठे दक्षिणमुखी शिवलिंग (महाकालेश्वर) और "काल और मृत्यु के स्वामी" के रूप में अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह अपनी भव्य वास्तुकला और दैनिक भस्म आरतीके लिए जाना जाता है, जो भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने के इच्छुक भक्तों को आकर्षित करता है, विशेष रूप से महाशिवरात्रिजैसे त्योहारों के दौरान ।
ज्योतिर्लिंग (Jyotirling) का अर्थ है 'प्रकाश का स्तंभ', जो भगवान शिव के दिव्य, प्रकाशमय और अनंत रूप का प्रतीक है, और ये वे 12 पवित्र स्थान हैं जहाँ शिव स्वयं ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे, जो भक्तों को मोक्ष और पापों से मुक्ति दिलाते हैं. इनका महत्व इसलिए है क्योंकि ये शिव के स्वयंभू (खुद प्रकट) रूप हैं, जो सीधे आत्मा को प्रभावित कर सभी कष्टों का निवारण करते हैं और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्रदान करते हैं, जिससे जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है.
Devi Kanyakumari Shakti Peeth | Kanyakumari Shakti Peeth ...कन्याकुमारी माता की कहानी देवी पार्वती के एक स्वरूप की है, जिनका जन्म बाणासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए हुआ था, जिसे केवल एक कुंवारी कन्या ही मार सकती थी; उन्होंने शिव से विवाह करने की तपस्या की, लेकिन नारद मुनि की चाल से विवाह टल गया, जिसके बाद देवी ने कुंवारी रहकर बाणासुर का वध किया और कलियुग के अंत तक वहीं रहने का निर्णय लिया, जिससे इस स्थान को 'कन्याकुमारी' (कुंवारी कन्या) नाम मिला। Kकन्याकुमारी

1 === बद्रीनाथ तीर्थयात्रा का महत्व आध्यात्मिक है; यह चार धाम यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा है, जो मोक्ष, पाप-मुक्ति और आत्मा की शुद्धि प्रदान करती है, जहाँ भगवान विष्णु के दर्शन होते हैं, अलकनंदा नदी के ब्रह्मकपाल में श्राद्ध करने से पितरों को शांति मिलती है, और यह स्थान नर-नारायण के मिलन, तथा आध्यात्मिक ज्ञान और प्राकृतिक सुंदरता का संगम है, जिसे जीवन में एक बार अवश्य करना चाहिए।
बद्रीनाथ यात्रा का महत्व (Significance of Badrinath Yatra)
चार धाम का हिस्सा (Part of Char Dham): बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ हिंदुओं के चार सबसे पवित्र धामों में से एक है, जो इस यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
मोक्ष और पाप मुक्ति (Moksha and Sin Redemption): ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ के दर्शन करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति) की प्राप्ति होती है।
मनोकामना पूर्ति: मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर इच्छा पूरी होती है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है.
3 ) --== वैष्णो देवी के दर्शन का महत्व गहरी आध्यात्मिकता, मनोकामना पूर्ति और आंतरिक शांति से जुड़ा है; भक्तों का मानना है कि यह यात्रा आस्था का प्रतीक है, जिससे सभी इच्छाएं पूरी होती हैं, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा व सकारात्मकता प्राप्त होती है, जिससे उन्हें दैवीय कृपा और जीवन में सच्चा सुकून मिलता है. यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्म-खोज और ईश्वर से जुड़ने का एक मार्ग है, जहाँ हर कदम पर भक्त को माता की शक्ति का अनुभव होता है.
4 पुष्कर जी दर्शन का महत्व बहुत गहरा है, क्योंकि इसे 'तीर्थराज' (सर्वोच्च तीर्थ) माना जाता है; यहाँ ब्रह्मा जी के एकमात्र मंदिर के दर्शन, पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान से पाप-ताप का नाश, पितरों को मोक्ष और उत्तम स्वास्थ्य व सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है, खासकर ब्रह्मा मंदिर और पुष्कर झील के दर्शन व स्नान से आध्यात्मिक लाभ होते हैं,
5 ----=कुरुक्षेत्र का महत्व महाभारत के संदर्भ में यह है कि यह वह पवित्र भूमि है जहाँ धर्म और अधर्म के बीच निर्णायक युद्ध लड़ा गया, भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया (कर्म, धर्म और ज्ञान का मार्ग दिखाया), और यह स्थान स्वयं 'धर्मक्षेत्र' ( धर्माचरण की भूमि) कहलाता है, जहाँ मृत्यु होने पर व्यक्ति पापमुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है, जिससे इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है।

आत्म-शुद्धि और साधना: यह एक कठोर तपस्या है जो व्यक्ति को सांसारिक मोह से दूर करके आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक विकास कराती है।
द्वारकाधीश के दर्शन का बहुत महत्व है, क्योंकि यह मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है, भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, और उन्हें सीधे भगवान कृष्ण के प्रेम और आशीर्वाद से जोड़ता है; यह चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और भक्तों को कृष्ण भक्ति के गहरे अनुभव से जोड़ता है, जिससे जीवन में समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान होता है.
द्वारकाधीश दर्शन के मुख्य लाभ:
मोक्ष और मुक्ति: शास्त्रों के अनुसार, द्वारकाधीश के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) प्राप्त करने में मदद मिलती है.
सकारात्मक ऊर्जा: यह स्थान जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
आध्यात्मिक शांति: दर्शन से गहरी आध्यात्मिक शांति और आंतरिक सुकून मिलता है
ऐतिहासिक: यह प्राचीन काल से महत्वपूर्ण रहा है, जहाँ राजा गंगासिंह और बाद में >>पाटई रावल जैसे शासकों का शासन रहा, और यह >>चंपानेर के ऐतिहासिक शहर के पास स्थित है.
सोमनाथ मंदिर का महत्व मुख्य रूप से इसके पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में है, जो भगवान शिव को समर्पित है और भक्तों को मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है; यह चंद्रदेव से जुड़ी पौराणिक कथा और ऋग्वेद में उल्लेखित होने के कारण ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भारत की समृद्ध संस्कृति और लचीलेपन का प्रतीक है.
धार्मिक और पौराणिक महत्व
पहला ज्योतिर्लिंग: यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे पवित्र माना जाता है, जो असीमित ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है.
चंद्रदेव की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रदेव (सोम) ने राजा दक्ष के श्राप से अपनी चमक खोने के बाद यहां तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें दर्शन दिए और 'सोमनाथ' कहलाए, जिससे इस स्थान का नाम पड़ा.
Nageshwar Temple in Gujaratनागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव को समर्पित12 सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंगोंमें से एक है , जो गुजरात के द्वारका के पास सौराष्ट्र तट पर स्थित है। यह अपने स्वयंभू शिवलिंग और भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, जोनागविष से सुरक्षा का प्रतीक है। शिव पुराण में वर्णित इस प्राचीन मंदिर में एक भूमिगत गर्भगृह है और यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जो अपनी आध्यात्मिक शक्ति और ऐतिहासिक कथाओं, जैसे कि एक भक्त को राक्षस से बचाने की कहानी, के कारण भक्तों को आकर्षित करता है।
मुख्य बातें:
स्थान: द्वारका के पास, गुजरात, गोमती द्वारका और बेयट द्वारका द्वीप के बीच।
महत्व: यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव को "नागेश्वर" के रूप में दर्शाता है।
किंवदंती: दारुका नामक एक राक्षस ने शिव भक्त सुप्रिया को कैद कर लिया था; भगवान शिव ने राक्षस को पराजित करने और स्वयंभू लिंग की स्थापना करने के लिए प्रकट हुए।

प्रयागराज पितरों के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहाँ पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) में पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है; इसे पितृ मुक्ति का पहला द्वार माना जाता है, जहाँ त्रिवेणी संगम पर मुंडन और पिंडदान करने से पितर तृप्त होते हैं और वंशजों को आशीष मिलता है, जिससे पितृ दोष भी शांत होता है। प्रयागराज में पितरों का महत्व

ब्रज 84 कोस यात्रा (चौरासी कोस परिक्रमा) का अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थलियों (जैसे मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव) से होकर लगभग 252 किलोमीटर (84 कोस) की परिक्रमा करते हैं, जिससे जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश, 84 लाख योनियों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, साथ ही मन की शुद्धि, कष्टों से निवारण और कृष्ण कृपा का अनुभव होता है. यह यात्रा भक्ति, तपस्या और समर्पण का प्रतीक है, जो आत्मा को कर्म से जोड़ती है.
महत्व के मुख्य बिंदु:
पाप-मुक्ति और मोक्ष: मान्यता है कि इस परिक्रमा से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे जन्म-मरण के चक्र (84 लाख योनियों) से मुक्ति और मोक्ष मिलता है.
श्रीकृष्ण की लीलाओं का अनुभव: यह यात्रा श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला और अन्य लीलाओं से जुड़े स्थानों से गुजरती है, जिससे भक्तों को उनके करीब होने का अहसास होता है.
मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि: परिक्रमा से मन शुद्ध होता है, नकारात्मकता दूर होती है, और जीवन में संतुलन व मानसिक शांति मिलती है.
तीर्थों का वास: पौराणिक कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी तीर्थों को ब्रज में बुलाया था, इसलिए इस यात्रा से सभी तीर्थों का फल मिलता
Khatu Shyam Mandir - खाटू श्याम जी मंदिर ...खाटू श्याम दर्शन का महत्व यह है कि यह भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं, जीवन की बाधाएँ दूर करते हैं, सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं, और कलियुग में "हारे का सहारा" कहे जाते हैं; यह दर्शन जन्मों के पापों से मुक्ति और कष्टों से राहत दिलाते हैं, खासकर फाल्गुन मास की एकादशी और द्वादशी पर दर्शन विशेष फलदायी माने जाते हैं.
खाटू श्याम दर्शन का महत्व
मनोकामना पूर्ति: माना जाता है कि खाटू श्याम जी अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं, चाहे वह धन, स्वास्थ्य या अन्य कोई इच्छा हो.
कष्ट निवारण: भक्तों के सभी दुख-दर्द और जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं.
सुख-समृद्धि: दर्शन से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है.
"हारे का सहारा": भगवान कृष्ण के वरदान के कारण, वे कलियुग में हर जरूरतमंद और हारे हुए व्यक्ति का सहारा बनते हैं.
पाप मुक्ति: दर्शन मात्र से जन्मों के पापों का नाश होता है.
सकारात्मक ऊर्जा: मंदिर की 13 सीढ़ियों से दर्शन करने पर सीधे नेत्र-संपर्क होता है, जिससे बाबा तुरंत राहत देते हैं (यह भक्तों की आस्था है).

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